आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजीव अरोड़ा के यहां हुई ईडी की रेड पर पार्टी ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह रेड भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं है, बल्कि अरविंद केजरीवाल और ‘‘आप’’ को खत्म करने के मकसद से हमारे नेताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तोता-मैना ने संजीव अरोड़ा के यहां रेड की है। मोदी जी, अरविंद केजरीवाल और ‘‘आप’’ को चुनाव में नहीं हरा पा रहे हैं। इसलिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग से इनकी ताकतें कम हो रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को इसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं है। प्रधानमंत्री को देश में महंगाई-बेरोजगारी की चिंता नहीं है। क्योंकि वह अहंकारी हैं। इसलिए लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब वह 75 साल के हों और उनकी विदाई हो। अदालतों से इनको हर दिन फटकार पड़ रही है फिर भी एजेंसियों के दुरुपयोग से बाज़ नहीं आ रहे।
सोमवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि कोर्ट कई बार कह चुका है कि यह जांच एजेंसियां गैरकानूनी तरीके से काम कर रही हैं। कोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसियां पिंजरे में बंद तोते की तरह व्यवहार कर रही हैं। वहीं, पीएमएलए का पूरा ढांचा एक के बाद एक कोर्ट के आदेश से ध्वस्त होता जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा विपक्ष को निशाना बनाने के लिए ईडी और सीबीआई को दी गई बेलगाम शक्तियां खत्म होती जा रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं रुक रहे हैं, क्योंकि वह अहंकारी हो गए हैं। उन्हें लगता है कि वह कोर्ट से ऊपर हैं, यहां तक कि भगवान से भी ऊपर हैं। हरियाणा के एग्जिट पोल आते ही, जब उन्हें लगा कि एक और राज्य उनके हाथ से निकल गया है तो वे फिर से विपक्ष को निशाना बना रहे हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी जी के जाने का वक्त आ गया है। इसलिए जाने से पहले वह जहां मिले, वहां पर हाथ-पांव मारने में लगे हुए हैं। जिसको तोड़ सकते हैं, तोड़ लो, जिसको डरा सकते हैं, डरा लो। लेकिन पूरा देश जानता है कि जिन ज्यादातर नेताओं पर ईडी छापे मारती है, वह बीजेपी जॉइन करते हैं और फिर केस बंद हो जाता है। बीजेपी की यह वॉशिंग मशीन अब जनता के बीच में एक्सपोज हो चुकी है। बीजेपी के खुद के वोटर्स इस वॉशिंग मशीन से परेशान हैं। यहां तक कि आरएसएस के कार्यकर्ता भी कह रहे हैं कि कल तक वो जिसके खिलाफ प्रचार कर रहे थे, वो अब खुद बीजेपी में हैं। उनके सिर शर्म से झुक चुके हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तोता-मैना को फिर से इशारा किया है और वो आम आदमी पार्टी के एक नेता पर टूट पड़े। पीएम नरेंद्र मोदी का एक ही मकसद है कि ‘‘आप’’ को कैसे खत्म करें। उन्होंने कहा कि हमारे पंजाब से राज्यसभा एमपी संजीव अरोड़ा के घर पर प्रधानमंत्री ने रेड करवाई है। यह रेड किसी भ्रष्टाचार की वजह से नहीं हुई है। यह रेड इसलिए हो रही है क्योंकि संजीव अरोड़ा ‘‘आप’’ के सांसद हैं। यह प्रधानमंत्री की कार्य प्रणाली है। वह ‘‘आप’’ को चुनाव में नहीं हरा पा रहे हैं और ना केजरीवाल व उनकी टीम को तोड़ पा रहे हैं। इसलिए एक बार फिर से ‘‘आप’’ के सांसद को घेरने की कोशिश की जा रही है।
मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि इन्होंने सबसे पहले सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। उसके बाद मुझे गिरफ्तार किया। फिर संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल को ईडी से गिरफ्तार करवाया। लेकिन सब बाहर आ गए और इनका केस तहस-नहस हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने उस केस के बारे में जिस तरह की टिप्पणियां की हैं उसके बाद तो नरेंद्र मोदी के इशारे पर झूठे-झूठे केस बना रहे अधिकारियों को डूब मरना चाहिए। इसके बावजूद भी प्रधानमंत्री रुक नहीं रहे हैं। एजेंसियों का इससे बड़ा गलत इस्तेमाल और क्या हो सकता है? जिस तरह से रोजाना सोते-जागते प्रधानमंत्री अरविंद केजरीवाल को खत्म करना चाहते हैं। कोर्ट इन अधिकारियों को पिंजरे का तोता कह चुका है। जिसको पीएमएलए बनाया गया था। जब इन्होंने पीएमएलए का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ गलत इस्तेमाल करना शुरू किया तो कोर्ट की तरफ से ऐसे ऑर्डर आए हैं कि उसके बाद पूरा का पूरा पीएमएलए व उसकी धाराएं कमजोर हो चुकी हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि एजेंसियों के गलत इस्तेमाल के चक्कर में सीबीआई और ईडी की पावर कम होती जा रही हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को इनकी चिंता नहीं है। वह खुद को कोर्ट व भगवान से ऊपर समझते हैं। प्रधानमंत्री को देश और देश के लोगों की चिंता नहीं है। इन्हें महंगाई व बेरोजगारी की भी चिंता नहीं है। इनके पास केवल एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का काम रह गया है। आज जो रहा है, वह इस बात प्रमाण है कि जो प्रधानमंत्री दिन-रात एक पार्टी को खत्म करने के बारे में सोचता रहता है, ऐसा प्रधानमंत्री देश के लिए खतरनाक है। आज देश के लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब प्रधानमंत्री 75 साल के हों और कब उनकी विदाई हो।