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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने महिला सफ़ाई कर्मचारियों-आशा वर्करों को किया सम्मानित

  • March 8, 2025

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर करोल बाग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने आशा वर्करों और महिला सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में करोल बाग से “आप” के विधायक विशेष रवि भी शामिल रहे।

इस अवसर पर “आप” नेता आतिशी ने कहा कि, “महिलाओं का सम्मान सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नहीं, बल्कि साल में 365 दिन होना चाहिए। यह समझना सबके लिए जरूरी है। पिछले 10-15 वर्षों में महिलाएं काफी आगे बढ़ी हैं, लेकिन आज भी यह सच्चाई है कि हमारे घरों में बेटी के पैदा होने पर कुछ लोग नाखुश जरूर होते हैं। 10 साल पहले जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब दिल्ली के सरकारी स्कूल बहुत टूटे-फूटे थे। उस दौरान मैं एक गर्ल्स स्कूल में जाकर लड़कियों से पूछा कि आप में से किस-किस के भाई प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। वहां मौजूद 90 फीसद लड़कियों ने बताया कि उनके भाई प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं।”

उन्होंने कहा कि, “अगर परिवार में किसी एक बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के पैसे होते थे तो लोग अपने बेटे को प्राइवेट स्कूल में और बेटियों को टूटे-फूटे सरकारी स्कूल में भेजते थे। आज भी हमारे देश की यह सच्चाई है। आज भी हमारे देश में एक बेटी को भार समझा जाता है। उनके बचपन से ही माता-पिता सोच रहे होते हैं कि बेटी की शादी करनी होगी, दहेज में सामान देना होगा। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम सबको मिलकर काम करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वास्तव में हमारे शहर और पूरे देश में महिलाओं को बराबरी का हक दिया जाए। इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।”

“आप” नेता आतिशी ने कहा कि, “लड़कियों को बराबरी का हक दिलाने में सबसे बडी भूमिका हमारी माताओं- बहनों का है। हम महिलाएं बोलती हैं कि लड़कियां ये काम नहीं कर सकती हैं, ऐसे नहीं रहना चाहिए या यहां नहीं जाना चाहिए। हम ही कहीं न कहीं छोटी उम्र से ही लड़कियों में यह भाव पैदा करते हैं कि वह किसी तरह लड़कों से कम रहें। हम लड़कियों को कहने हैं कि खाना बना लो, पानी ला दो, लेकिन यही बात अपने बेटों को नहीं कहते हैं। बेटों को तो माताएं अपने हाथ से खाना खिलाती हैं। आज अगर आज हमारे देश में लड़कियों के लिए समानता की कमी है तो उसके लिए महिलाएं भी जिम्मेदार हैं। अगर वास्तव में समाज में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाना है तो हमें सबसे पहले इसकी शुरूआत अपने घरों से करनी होगी। तभी इस बदलाव की शुरूआत होगी।”

उन्होंने कहा कि, “यह बिल्कुल ठीक बात है कि आज सभी लड़कियां स्कूल जा रही हैं, लेकिन 12वी पास हो जाने के बाद माता-पिता के मन में ख्याल आता है कि बेटी को आगे पढ़ाएं या नहीं। कॉलेज में फीस कितनी लगेगी। हमें अपनी बेटियों को स्कूल-कॉलेज में पढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी होगी। साथ ही, बेटों की तरह बेटियों को अपने पांव पर खड़े होने के लिए नौकरी करने का अवसर देना होगा। महिलाएं तब स्वतंत्र होती हैं, जब उनके हाथ मे पैसे होते हैं। जब महिलाएं खुद पैसा कमाकर लाती हैं तो उनको बराबरी का अधिकार मिलता है। महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए हमें सिर्फ लड़कियों में ही बदलाव नहीं लाना होगा, बल्कि लड़कों की सोच में भी लाना होगा। सिर्फ लड़कियो को समझाना काफी नहीं हैं, हमें लड़कों को भी समझाना होगा कि लड़के और लड़कियां बराबर हैं।”

“आप” नेता आतिशी ने कहा कि, “आज भी बहुत पढ़े-लिखे घरों में भी पति-पत्नी नौकरी करते हैं। दोनों शाम ड्यूटी से घर वापस आते हैं। इसके बाद पति टीवी के सामने बैठ जाता है, लेकिन पत्नी दिन भर काम करने के बाद घर में भी काम करती है। यह गलती हमारी भी है कि हमने अपने बेटों के अंदर यह संस्कार नहीं डाला कि हर व्यक्ति बराबर होता है और हर काम में बराबरी की हिस्सेदारी करना जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि, “यह सच है कि हमारी बुजुर्ग महिलाओं ने हमसे भी ज्यादा समाज में असमानताओ का सामना किया है। लेकिन अगर अपनी बेटियों के लिए समाज को बदलना पड़े तो इसकी शुरूआत हम सभी को अपने घरों से करनी पड़ेगी। अगर हम अपने घर से शुरूआत करते हैं तो ये बेटियां भी बदलेंगी और यह समाज भी बदलेगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी को प्रण लेना होगा कि अपने बेटे-बेटियों के मन में बराबरी का भाव लेकर आना है। अगर हमें देश और समाज को बेहतर बनाना है तो यह हमारी ही जिम्मेदारी है और यह जिम्मेदारी हमारे परिवार व घर से शुरू होती है।”

“आप” नेता आतिशी ने पढ़ाई कर रही बच्चियों से कहा कि , “समाज में बहुत लोग कहने वाले मिल जाएंगे कि लड़कियां ये काम नहीं कर सकती हैं। लड़कियों को ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। लड़कियां सब कुछ कर सकती हैं। आज लड़कियां बड़ी-बड़ी कंपनियों की सीईओ हैं। लड़कियां चांद तक पहुंच गई हैं। स्पोर्ट्स में भी देश के लिए मेडल ला रही हैं। हमारे देश में मुख्यमंत्री भी महिलाएं हैं और प्रधानमंत्री भी महिला रही हैं। हमारे देश की राष्ट्रपति भी एक महिला हैं। इसलिए अगर कोई बेटियों को कहे कि लड़कियां ये काम नहीं कर पाएंगीं तो उनको जवाब देना है कि लड़कियां सबकुछ कर सकती हैं और आगे करके दिखाएंगी भी।”

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