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नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत योजना को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा

  • March 18, 2025

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर संदीप पाठक ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। संदीप पाठक ने हेल्थ और वेलफेयर विषय पर मंगलवार को राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि हेल्थ एक ऐसा विषय है जिसको हम राज्य और केंद्र में बांटकर देखेंगे तो इसको देश कभी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। हमारे बच्चे और हमारे परिवार के लोग इस भावना से प्रताड़ित होते रहेंगे। यह विषय पूरे देश का विषय है। 2014 में छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा चलाए जा रहे नसबंदी कैंपेन में पहले ही दिन सर्जरी कराकर घर पहुंचने वाली 10 महिलाओं की मौत हो जाती है। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने से 63 बच्चों की मौत हो जाती है। इसी अस्पताल में 2016 में 5000 से ज्यादा और 2014 में 6000 से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है। नांदेड के सरकारी अस्पताल में एक दिन में 33 लोगों की मौत हो जाती है जिनमें 12 बच्चे होते हैं। इसका कारण कम स्टाफ और कम डॉक्टर होना था।

संदीप पाठक ने आगे कहा कि यह बदहाली आज किसी एक राज्य नहीं बल्कि पूरे भारत की हेल्थ व्यवस्था की एक पिक्चर है जो हम सबके सामने है। इसको लेकर सरकार ने जरूर कोई टारगेट या प्लानिंग की होगी, कोई बजट बनाया होगा। मेरा सवाल है कि जो प्लानिंग या टारगेट बनाया गया है क्या वह काफी है? जो बजट बनाया गया है क्या वह काफी है? 2017 में सरकार एक नेशनल हेल्थ पॉलिसी लेकर आती है। इस पॉलिसी में बताया जाता है कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को अच्छी और शानदार हेल्थ सेवा मिलेगी। इसमें नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान योजना दो प्रमुख पैरामीटर थे। नेशनल हेल्थ मिशन का उद्देश्य राज्य सरकारों को इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पैसे देना था। यह पैसा जिला अस्पतालों की दिशा और दशा बदलने के लिए था। आज देशभर के सरकारी अस्पतालों के हालात ऐसे हैं कि आप किसी भी जिले में चले जाइए वहां पर या तो अस्पताल ही नहीं है, या डॉक्टर नहीं है, या दवाई नहीं है या फिर टेस्टिंग नहीं हो रही है। अगर यह सभी चीजें उपलब्ध हैं तो वहां पर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड खाली नहीं हैं। यह स्थिति आज पूरे देशभर के सरकारी अस्पतालों की है।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने एक सर्वे कराया था जिसमें सभी हेल्थ संस्थाओं से कहा गया था कि वह अपना आत्म मूल्यांकन करें। इस सर्वे में पाया गया कि देश के 80 फ़ीसदी से ज्यादा सरकारी अस्पताल अनफिट और बेकार गुणवत्ता वाले थे। आज भारत में 10000 मरीजों पर सिर्फ 10 ही डॉक्टर हैं जबकि अन्य देशों में 10000 मरीजों पर लगभग 30 डॉक्टर हैं। हमारे देश में शहर में तो डॉक्टरों की संख्या अच्छी है लेकिन गांव में डॉक्टरों की बहुत ज्यादा कमी है। मैं गांव से आता हूं और मैं जानता हूं कि एक गांव का गरीब इलाज कराने के लिए अपना क्या-क्या बेच देता है। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना पर बोलते हुए संदीप पाठक ने कहा कि इस योजना को सही तरीके से डिजाइन नहीं किया गया है। इसमें कहा गया है कि गरीबी रेखा में जीवन जीने वाले 40 फीसदी लोगों के परिवार को हर साल 5 लाख तक का इंश्योरेंस दिया जाएगा। इसमें लाभार्थियों की पहचान से ही कमी दिखनी शुरू हो जाती है। इसमें 10 करोड लोगों को अंकित किया गया था लेकिन सिर्फ दो करोड़ लोग ही इस योजना के अंतर्गत आने वाले पाए गए, बाकी के 8 करोड़ लोग मैच नहीं हो पाए। फिर सरकार ने फैसला लिया कि हम किसी भी मैचिंग में नहीं पड़ेंगे जो भी मरीज आएगा उसका इलाज किया जाएगा।

संदीप पाठक ने आगे कहा कि कैग की रिपोर्ट में इस योजना में बड़ी तादाद में गलत और फ्रॉड नाम सामने आए। आयुष्मान भारत योजना देश ही नहीं पूरी दुनिया की एक ऐसी अजीब स्कीम है जो मरीज को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि अस्पताल को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इस योजना के तहत कोई भी अस्पताल यह कह सकता है कि मैं तो सिर्फ आंख का इलाज करूंगा बाकी और इलाज नहीं करूंगा। कोई अस्पताल कह सकता है कि मैं ऑपरेशन करूंगा अन्य दूसरा इलाज नहीं करूंगा। बीमारी के आधार पर इस योजना को लागू किया गया है जबकि CGHS और अन्य प्राइवेट इंश्योरेंस स्कीम को अस्पताल के आधार पर इंपैनलमेंट किया गया है। अगर किसी मरीज का ऑपरेशन हो रहा हो और अचानक उसकी आंख में कोई परेशानी आ जाए तो उसको कह दिया जाएगा कि योजना के तहत आपका सिर्फ ऑपरेशन किया जाएगा, आंख के इलाज के लिए अलग से पैसे लगेंगे। इसलिए मैं कह रहा हूं कि आयुष्मान भारत योजना को बनाने के डिजाइन में ही कमी है। इस योजना से पैसा कमाने के लिए छोटे-छोटे अस्पताल ऑपरेशन की जरूरत ना होने के बावजूद भी मरीज का ऑपरेशन कर देते हैं। एक मरीज के लिए जो जरूरी सर्जरी है वह उन छोटे अस्पतालों में नहीं हो सकती और जो बीमारी दवाई से सही हो सकती है उसका ऑपरेशन कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि कम कमाई करने वाले लोगों के लिए आपने नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत योजना बनाई लेकिन मिडिल क्लास लोगों को ध्यान में रखकर कोई स्कीम नहीं बनाई है। जो मिडिल क्लास सरकार को टैक्स दे रहा है उसे इन दोनों योजनाओं में से किसी भी योजना का फायदा नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार की गंदी राजनीति की वजह से ही आज देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत बदतर हो गई है। नेता जहां चाहे वहां इलाज करा सकते हैं

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