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एक तरफ केजरीवाल हैं, जिन्होंने सिद्धांतों व ईमानदारी के लिए दो-दो बार सीएम की कुर्सी छोड़ दी और दूसरी तरफ मोदी जी हैं, जो 75 साल में भी कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं- संजय सिंह

  • September 23, 2024

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए पांच सवालों का अभी तक जवाब नहीं आया है। इस पर ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने प्रश्न किया कि इन प्रश्नों का मोहन भागवत कब जवाब देंगे? जब से केजरीवाल ने यह प्रश्न पूछे हैं, आरएसएस और भाजपा में सन्नाटा पसरा है। इसका मतलब है कि इन सवालों में सच्चाई है और पूरा देश इसका जवाब चाहता है, लेकिन यह लोग इन सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। आरएसएस और भाजपा ने खुद यह नियम बनाया था कि 75 साल बाद भाजपा नेता रिटायर कर दिए जाएंगे। इसी नियम के तहत लालकृष्ण आडवाणी समेत कई नेताओं को रिटायर किया गया, तो क्या मोदी जी पर यह लागू नहीं होना चाहिए? उन्होंने कहा कि एक तरफ केजरीवाल हैं, जिन्होंने दो-दो बार सीएम की कुर्सी त्याग दिया और कहा कि हम सिद्धांतों, ईमानदारी और सच्चाई की लड़ाई लड़ेंगे और दूसरी तरफ मोदी जी हैं, जो 75 साल में भी कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं।

सोमवार को आम आदमी पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर संजय सिंह ने कहा कि अपने आपको देशभक्त और राष्ट्रवादी कहने वाली संस्था आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत से ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केवल पांच सवाल पूछे हैं और यह सवाल सिद्धांतों, वसूलों और सच्चाई से जुड़े हुए हैं। अरविंद केजरीवाल हिन्दुस्तान के वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने वसूलों और सिद्धांतों पर मुख्यमंत्री के पद को एक बार नहीं, बल्कि दो बार त्याग दिया और कहा कि हम सिद्धांतों, वसूलों, ईमानदारी और सच्चाई की लड़ाई लड़ेंगे। केजरीवाल ने पहले 49 दिन की सरकार से मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया। आज कोई चपरासी की नौकरी नहीं छोड़ना चाहता है। जेल से बाहर आने के बाद जब वसूलों और सिद्धांतों की बात आई तो अरविंद केजरीवाल ने दो मिनट में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। देश के सामने यह बात खुली किताब की तरह है कि एक तरफ अरविंद केजरीवाल जैसे सच्चे और ईमानदार नेता हैं, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी दो-दो बार छोड़ कर ईमानदारी, वसूलों और सच्चाई की लड़ाई लड़ते हैं और दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री हैं जो 75 साल में भी अपनी कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच में अंतर है। केजरीवाल के पांच सवालों का जवाब मोहन भागवत और भाजपा को देना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल द्वारा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए पांच सवालों का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि केजरीवाल का पहला प्रश्न है कि अपने आपको देशभक्त और राष्ट्रवादी कहने वाली आरएसएस क्या इस बात से सहमत है कि आज भाजपा एक अपहरण गैंग बन चुकी है। भाजपा पार्टियों को तोड़ने वाला एक गिरोह बन गई है। भाजपा द्वारा ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर और करोड़ों रुपए का लालच देकर दूसरी पार्टियों के विधायकों, सांसदों व पार्टियों को तोड़ना और सरकारों को गिराना क्या सही काम है? इस पर आरएसएस प्रमुख की क्या राय है? दूसरा, मोदी जी ने जिन नेताओं को देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी कहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने विपक्ष के 23 नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और उनको अपनी पार्टी में शामिल कर क्लीन चिट दे दी। मोदी जी की वॉशिंग मशीन में धुल कर सभी पाक साफ हो गए। जिन नेताओं ने खुद मोदी जी, अमित शाह और भाजपा ने भ्रष्टाचारी बताया, जिन नेताओं पर 70 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप प्रधानमंत्री ने लगाए, उन्हें ही भाजपा में शामिल कर लिया। मोहन भागवत को यह कार्रवाई कैसी लगती है, क्या वास्तव में मोहन भागवत इन भ्रष्टाचारियों को भाजपा में शामिल करने पर सहमत हैं या असहमत हैं।

संजय सिंह ने तीसरे प्रश्न का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस कहता है कि हम नैतिकवादी मूल्यों पर चलने वाले लोग हैं और आरएसएस कहता है कि हम राष्ट्रीय स्वयं सेवक हैं और राष्ट्र की सेवा करने के लिए आए हैं। भाजपा पर नजर रखने की जिम्मेदारी आरएसएस की थी ताकि वह पथ भ्रष्ट न हो पाए और पथ भ्रष्ट होने की कोशिश करे तो उस पर अंकुश लगाई जाए। क्या मोहन भागवत ने भाजपा के पथ भ्रष्ट होने और इन सब कार्रवाइयों पर कभी अंकुश लगाने की कोशिश की, क्या इन कार्रवाइयों से सहमत हैं या असहमत हैं। केजरीवाल ने मुफ्त बिजली, पानी, इलाज, महिलाओं को बस यात्रा, बुजुर्गों की तीर्थयात्रा की सुविधा देने के बाद भी दिल्ली को मुनाफे का बजट दिया। जब ऐसे मुख्यमंत्री को जेल में डाला जाता है तो क्या मोहन भागवत के मन में प्रश्न उठता है कि भाजपा और मोदी जी यह काम गलत कर रहे हैं।

संजय सिंह ने चौथा प्रश्न रखते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लोकसभा चुनाव के दौरान खुले तौर पर कहा कि अब हमें आरएसएस की जरूरत नहीं है। तो क्या बेटा इतना बड़ा हो गया कि मां को आंखें दिखाने लगा। आरएसएस भाजपा की मातृ संस्था है और उसकी कोंख से पैदा हुई है। आज उसी आएसएस को मोदी जी, जेपी नड्डा और अमित शाह आंखें दिखाने का काम कर रहे हैं। आरएसएस प्रमुख को जेपी नड्डा की कही हुई यह बात कैसी लगी? मोहन भागवत और आएसएस के कार्यकर्ताओं के मन को ठेस पहुंची या नहीं।

संजय सिंह ने पांचवें प्रश्न का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस और भाजपा ने अपने संगठन के लिए एक सिद्धांत निर्धारित किया था कि 75 साल पूरा होने पर भाजपा के नेता को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। 75 साल पूरे होने के बाद कोई लोकसभा और विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा, कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मंत्री नहीं बनेगा। 75 साल की उम्र होने पर भाजपा के नेता रिटायर होना पड़ेगा। लेकिन अमित शाह का कहना है कि मोदी जी 75 साल के बाद भी प्रधानमंत्री रहेंगे और रिटायर नहीं होंगे। यह तो देश की जनता को तय करना है कि वह आगे प्रधानमंत्री रहेंगे या नहीं, लेकिन अमित शाह कह रहे हैं कि 75 साल की उम्र होने के बाद भी प्रधानमंत्री का पद नहीं छोड़ेंगे।

संजय सिंह ने कहा कि 75 साल की उम्र पूरी होने पर लालकृष्ण आडवानी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, बीसी खंडूरी, कलराज मिश्रा समेत तमाम नेताओं को पद से हटा दिया गया और चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। आरएसएस और मोदी जी ने जो नियम पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए बनाया, क्या वह नियम उन नेताओं को राजनीति से बेदखल करने और निपटाने के लिए बनाया। अगर आपने यह नियम बनाया है तो आप पर वह नियम क्यों नहीं लागू होगा?

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