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यूपी में योगी सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में ओबीसी को 4 और एससी को मात्र 16 फीसद ही आरक्षण दिया था- जस्मीन शाह

  • August 20, 2024

लेटरल इंट्री के जरिए आईएएस स्तर के 45 बड़े पदों को भरने का आदेश वापस लेने पर आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया है। ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता जस्मीन शाह ने कहा कि मोदी सरकार चोर दरवाजे से एससी, एसटी, ओबीसी के आरक्षण का हक मार रही थी, लेकिन जब चारों तरफ से उस पर दबाव पड़ा तो उसने मजबूरी में आदेश वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लेटरल इंट्री से 45 बड़े पद भरने जा रही थी, लेकिन उसमें आरक्षण का प्रावधान नहीं था। इससे पहले, सरकार 2018 से 2024 के बीच एससी, एसटी, ओबीसी को बिना आरक्षण दिए लेटरल इंट्री से 63 बड़े पद भर चुकी है। उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार बताए कि पहले जिन 63 लोगों को लेटरल इंट्री के जरिए नौकरी दी जा चुकी है, अब क्या उनकी नियुक्ति का आदेश भी वापस लेगी। क्योंकि डीओपीटी के अनुसार, 45 दिन से ज्यादा सरकारी नौकरी में रखने पर आरक्षण देना अनिवार्य है और यह बात केंद्र ने भी सुप्रीम कोर्ट में स्वीकारा है। फिर भी एससी, एसटी, ओबीसी समाज के साथ अन्याय किया जा रहा है।

लेटरल इंट्री के जरिए बड़ पदों को भरने की हो रही कोशिश को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता जस्मीन शाह, विधायक कुलदीप कुमार और विशेष रवि ने पार्टी मुख्यालय में संयुक्त प्रेसवार्ता की। जस्मीन शाह ने कहा कि लोकतंत्र में जब आप चोरी-छिपे कुछ करने जाते हो और फिर जब आपकी चोरी पकड़ी जाती है तो आप कहने लगते हैं कि नहीं, इनके साथ तो न्याय होना चाहिए। केंद्र में भाजपा की ही सरकार है। भाजपा की सरकार का ही आदेश भी है। इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी पेश करती है और कहती है कि हम तो एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के साथ खड़े हैं। 45 दिन से ज्यादा की अगर सरकारी नौकरी होगी तो हम उनको आरक्षण देंगे। लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार पहले ही 63 लोगों को आईएएस स्तर की नौकरी दे चुकी है। 45 और लोगों को देने वाले थे। लेकिन केंद्र सरकार पर चारों तरफ से दबाव आया तो अब अपने आदेश को वापस ले लिया। भाजपा की केंद्र सरकार यह बताए कि जिन 63 लोगों को लेटरल इंट्री के जरिए नौकरी दे चुकी है, क्या उनकी नियुक्ति भी वापस लेगी। अगर भाजपा की मंसा साफ है तो मोदी सरकार ने पिछले 10 सालों में आरक्षण खत्म करने के जितने पाप किए हैं, चाहे विश्वविद्यालय, क्लास 3, 4 की आउटसोर्सिंग, लेटरल इंट्री समेत सभी चीजों पर एससी, एसटी, ओबीसी के युवाओं के साथ क्या न्याय करेगी। जब तक केंद्र यह साफ नहीं करेगा, तब 45 पदों को भरने का आदेश वापस लेने का फैसला मजबूरी में उठाया गया कदम ही माना जाएगा।

जस्मीन शाह ने कहा कि पूरा देश जानता है कि अगर कोई ऐसी पार्टी है जो संविधान और आरक्षण की दिन-दहाड़े हत्या करने पर तुली है, तो वह भाजपा है। पिछले कई सालों से हम देख रहे हैं कि भाजपा से जुड़े कई नेता आरक्षण और संविधान विरोधी बयान देते आ रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बड़े-बड़े नेता, मंत्री और सांसद कह रहे थे कि उन्हें 400 से अधिक सीटें चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि 400 क्यों चाहिए, तो कहने लगे कि मोदी जी बड़ा काम करने वाले हैं। उन्हें लगा कि देश की जनता बेवकूफ है और उनका इशारा नहीं समझेगी। लेकिन भारतीय मतदाताओं की सूझबूझ की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने समय रहते भाजपा की चाल को समझ लिया। मतदाता समझ गए कि भाजपा के 400 पार का मतलब आरक्षण को खत्म करना है। इसलिए 400 पार का नारा देने वाली भाजपा 240 पर आकर सिमट गई। हमें यकीन था कि जनता के इस जनादेश के बाद भाजपा को सबक मिलेगा और उनके तेवर बदलेंगे। वो आरक्षण को और मजबूत करने के बारे में सोचेंगे, लेकिन पिछले एक हफ्ते में हुई दो घटनाओं ने बता दिया कि भाजपा ने 2024 के चुनाव से कोई सीख नहीं ली।

जस्मीन शाह ने कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करके जिस आरक्षण को खुलेआम खत्म करना चाहती थी, जनता का जनादेश उसके पक्ष में न जाने के बाद अब वह उसे चोरी-छिपे अंजाम देने की कोशिश कर रही है। सबसे पहले एक मामला सामने आया, जिसमें भाजपा ने आईएएस अधिकारी, डायरेक्टर और अंडर सेक्रेटरी जैसे बड़े-बड़े 45 सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के लिए विज्ञापन निकाला, जिसमें आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी। यह पहली बार नहीं है कि भाजपा ऐसा पाप कर रही है। मोदी सरकार 2018 से 2024 के बीच अब तक 63 पदों को लेटरल एंट्री के माध्यम से भर चुकी है, जहां आरक्षण लागू नहीं था। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जब पहला विज्ञापन निकला, तब पता चला कि अब वो आईएएस की भर्ती में भी आरक्षण को खत्म करना चाहती हैं।

जस्मीन शाह ने आगे कहा कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। भाजपा शासित राज्य सरकारों में भी यही हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार पिछले 4-5 सालों से 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती कर रही थी, लेकिन उसमें एससी, एसटी समाज के युवाओं को अपने हक की नौकरियां नहीं मिलीं। ओबीसी समाज को 27 फीसद आरक्षण मिलता है, लेकिन योगी सरकार ने केवल 4 फीसद युवाओं को नौकरी दी। एससी समाज को 21 फीसद का आरक्षण मिलता है, लेकिन योगी सरकार ने केवल 16 फीसद युवाओं को रोजगार दिया। युवाओं ने आवाज उठाई, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी एक न सुनी। मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लेकर संविधान की रक्षा की और इन भर्तियों को खारिज किया। एक हफ्ते के अंदर ये दो बड़े उदाहरण दिखाते हैं कि भाजपा देश विरोधी, संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी पार्टी है।

जस्मीन शाह ने कहा कि पिछले कई दशकों से भाजपा का केवल एक ही प्रयास है कि किस तरह पिछड़े और वंचित समुदायों के युवाओं को दबाया जाए और उन्हें सरकारी नौकरियां न दी जाएं। इससे पहले 40 विश्वविद्यालयों में दाखिलों के समय आरक्षण को हटा दिया गया था। इसके बाद लेटरल एंट्री का सिस्टम बनाया गया, जहां से भी आरक्षण को हटा दिया गया। अगर भाजपा और उसका कोई मंत्री इन पदों से आरक्षण हटाने के लिए देश के नियम-कानूनों का हवाला देता है, तो यह सरासर झूठ है। केंद्र सरकार के अधीन आने वाले डीओपीटी (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग) विभाग ने 21 नवंबर 2022 को सभी मंत्रालयों के लिए एक मेमोरेंडम जारी किया था, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि अगर किसी पद पर 45 दिन से अधिक की नियुक्ति की जाती है, तो उस पर आरक्षण लागू करना अनिवार्य है। अगर कोई विभाग आरक्षण नहीं देता, तो वह संविधान और कानून का उल्लंघन कर रहा है। लेकिन भाजपा के नेता कह रहे हैं कि यह लेटरल एंट्री केवल 3 से 5 साल तक सीमित है, इसमें आजीवन नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन भारत सरकार का मेमोरेंडम खुद कहता है कि 45 दिन की भी अस्थाई भर्ती होने पर भी आरक्षण देना जरूरी है। यानी भाजपा झूठ बोल रही है। एक बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है कि किस तरह एससी-एसटी समुदाय के लोगों को सरकारी नौकरियों से वंचित किया जाए।

जस्मीन शाह ने आगे बताया कि सरकार की संविदा और आउटसोर्स भर्तियों में आरक्षण न मिलने पर किसी व्यक्ति ने अदालत में एक पीआईएल दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर उसका पक्ष पूछा कि क्या इन पदों पर आरक्षण होना चाहिए? इस पर केंद्र सरकार ने अपने 21 नवंबर 2022 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए बताया कि इसमें आरक्षण लागू होना चाहिए। यानी ये लोग सुप्रीम कोर्ट और अपने मेमोरेंडम में कुछ और कह रहे हैं, लेकिन जब भर्तियां निकालते हैं, तो आरक्षण नहीं देते। यह पूरे एससी-एसटी समुदाय के साथ घोर अन्याय और धोखा है।

वहीं, कुलदीप कुमार ने कहा कि भाजपा हमेशा बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के विरोध में रही है। भाजपा का एक पूरा इतिहास रहा है; वह हमेशा से संविधान की आलोचना करती आई है और उसे बदलने की बात करती रही है। 2024 में भी उसने संविधान को बदलने की बात कही थी। लेकिन देश के पिछड़े समाज ने इस बार भाजपा को सबक सिखा दिया। यह बेहद गंभीर विषय है कि बाबा साहब अंबेडकर ने अपने प्रयासों से जिन दबे-कुचले वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया था, आज भाजपा पिछले दरवाजे से उस आरक्षण को खत्म करना चाहती है। अभी 45 आईएएस अफसरों की लेटरल एंट्री कराई गई, जिन्हें ज्वाइंट सेक्रेटरी बना दिया गया। अगर इसमें आरक्षण दिया जाता, तो उसमें 6 आईएएस एससी, 3 एसटी और 12 ओबीसी समुदाय से होते। भाजपा ने 21 लोगों का अधिकार छीना है। सबने देखा है कि भाजपा ने देश की बड़ी-बड़ी संस्थाओं में आरक्षण को समाप्त करने का काम किया है। देश के 40 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में आरक्षण को खत्म कर दिया गया। यहां तक कि मोदी सरकार ने तीसरी और चौथी श्रेणी की नौकरियों से भी आरक्षण समाप्त कर दिया है। भाजपा पूरी तरह से दलित और पिछड़ा विरोधी है। वह किसी भी तरह से इन लोगों से आरक्षण छीनना चाहती है। लेकिन भाजपा जान ले कि आज हमारा दलित और पिछड़ा समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है। भाजपा और मोदी जी जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन हमारा समाज चुप बैठने वाला नहीं है। यह समाज भाजपा को सबक सिखाएगा और अपना हक लेकर रहेगा। देश की जनता ने 2024 में भी इन्हें सबक सिखाया है। हम सड़क से लेकर सदन तक इसके लिए लड़ाई लड़ेंगे।

“आप” विधायक विशेष रवि ने कहा कि व्यक्ति जब कुछ बोलता है या कदम उठाता है, तो उसकी मंशा साफ हो जाती है। आज लेटरल एंट्री में एससी-एसटी समुदायों के आरक्षण को खत्म करना भाजपा की असली मंशा को उजागर कर रहा है। लंबे समय से हम देखते आ रहे हैं कि भाजपा को एससी-एसटी समुदाय के लोगों से समस्या रही है। उसे शायद लगता है कि एससी-एसटी समुदाय के लोग उनसे कमतर हैं, इसलिए वह लगातार इन समुदायों से मौकों को छीनने की कोशिश कर रही है। यह मामला एक बहुत बड़ा उदाहरण है कि कैसे इन संवेदनशील पदों पर, जो सीधे तौर पर समाज से जुड़े हुए हैं, निजी व्यक्तियों की भर्ती करवाई जा रही है, जिनके पास न कोई जिम्मेदारी होती है और न ही उन्हें नौकरी देने के बाद कोई जवाबदेही तय की जा सकती है। सरकार ऐसे लोगों की भर्ती करके समाज को किस दिशा में ले जाना चाहती है? भाजपा ने हमेशा से एससी-एसटी समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव किया है। यह घटना भी अपने आप में बड़ा उदाहरण है कि किस तरह खुलेआम भेदभाव हो रहा है। लेकिन आज देश की जनता जागरूक है। आम आदमी पार्टी ने भी इसका विरोध किया और सभी दलों ने मिलकर इस पर अपना पक्ष रखा, जिसके कारण भाजपा को इसे वापस लेना पड़ा। आज देश की जनता सब देख रही है। खासकर एससी-एसटी समाज के लोग यह बताएंगे कि भेदभाव का अंजाम क्या होता है।

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