आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी का त्याग करने के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास का भी त्याग कर दिया। वह अपने वृद्ध माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ फिरोजशाह रोड स्थित नए आवास में शिफ्ट हो गए। महज दो छोटे टेंपो में सामान लेकर अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री आवास से निकलें। मुख्यमंत्री आवास खाली करने दौरान वहां के कर्मचारियों से उन्होंने हाथ मिलाया और सबसे गले मिले। आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरविंद केजरीवाल जैसी शख्सियत राजनीति में जल्दी नहीं देखने को मिलती हैं। उन पर झूठे इल्ज़ाम लगाए गए और जब उन्हें कोर्ट से जमानत मिली तो उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना स्वीकार नहीं किया और पद को त्याग दिया। अब उन्होंने सरकारी आवास भी छोड़ दिया है। उन्हें न तो कोई लोभ है और ना ही अफसोस है। अब दिल्ली की जनता उनकी ईमानदारी पर मुहर लगाएगी।
‘‘आप’’ सांसद संजय सिंह ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि मेरा घर खाली है। मैं अपना घर एक घंटे में खाली कर दूंगा। मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मेरे घर में आकर रहें। सिर्फ आरोप के लिए आरोप लगाना, सिर्फ मजाक उड़ाना, यह ठीक प्रवृति नहीं है। अरविंद केजरीवाल और हम सबने कहा था कि वह आवास मुख्यमंत्री का है। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और उन्होंने उस सरकारी आवास का त्याग कर दिया। लोग तो अपने बंगलों और सुविधाओं से सालों तक चिपके रहते हैं। ऐसे कई नेताओं को मैं जानता हूं। इसलिए भाजपा बताए कि अगर प्रधानमंत्री मेरे घर में आकर रहने के लिए तैयार हों तो मैं अपना घर खाली कर देता हूं।
उधर, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने न तो एलजी साहब और ना ही भाजपा नेताओं के दबाव में इस्तीफा दिया है। उन्होंने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है। इसलिए मुख्यमंत्री पद के साथ जुड़ी हुई सुविधाओं को भी छोड़ने का फैसला भी अरविंद केजरीवाल का ही है। उन्हें भाजपा से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। अरविंद केजरीवाल को जो सही लगा उन्होंने किया। भाजपा को जो सही लगता है वो वैसा करे। अगर भाजपा को उस बंगले से इतनी तकलीफ है तो उसके सातों सांसद बंगलों में रह रहे हैं, उसे भी खाली करवा दे। भाजपा को अपने अंदर यह बदलना पड़ेगा।