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भाजपा सरकार गरीब विरोधी, निजी स्कूल-अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने पर लगाई रोक- सौरभ भारद्वाज

  • April 15, 2025

भाजपा गरीब विरोधी है। इसलिए उसकी दिल्ली सरकार ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने पर रोक लगा दी है ताकि गरीब लोग निजी स्कूल और अस्पतालों में मिलने वाले 10 फीसद आरक्षण का लाभ न ले सकें और ना ही इसके जरिए सरकारी नौकरी पा सकें। भाजपा सरकार का यह फैसला निजी स्कूल व अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है। अगर ईडब्ल्यूए सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया में कोई खामी है तो सरकार उसे ठीक करे। लेकिन एलजी द्वारा लगाए गए अधिकारियों की गलती की सजा आम जनता को क्यों दी जा रही है? इसलिए सरकार को बताना चाहिए कि ग़लत सर्टिफिकेट बनाने वाले कितने डीएम और एसडीएम पर कार्रवाई की गई? मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने यह बातें कहीं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद से रोज ऐसे निर्णय सामने आ रहे हैं, जिनसे यह यकीन होने लगा है कि भाजपा ने दिल्ली की सत्ता ऐसे लोगों के हाथों में सौंप दी है, जिन्हें सरकार और प्रशासन चलाने का कोई अनुभव नहीं है। उन्होंने टीवी शो “पंचायत” का संदर्भ देते हुए कहा कि फुलेरा की पंचायत भी इस तरह के काम नहीं कर रही, जिस तरह दिल्ली की सरकार कर रही है। इसका एक ताजा उदाहरण सोमवार को सामने आया है। सोमवार को दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि दिल्ली में अब ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट नहीं बनेंगे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय, आईपी विश्वविद्यालय समेत तमाम कॉलेजों में दाखिले का दौर शुरू है। बच्चे फॉर्म भर रहे हैं। ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसद कोटा निर्धारित है। अगर सरकार ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट ही बनाना बंद कर देगी तो 10 फीसद कोटा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को कैसे मिलेगा? अस्पतालों में 10 फीसद बेड ईडब्ल्यूएस मरीजों के लिए आरक्षित हैं। साथ ही 25 फीसद ओपीडी और 10 फीसद आईपीडी सेवाएं ईडब्ल्यूएस मरीजों के लिए मुफ्त हैं। अगर के घर में कोई बीमार पड़ता है और अगर वो दिल्ली में ईडब्ल्यूएस कोटे में दाखिला लेना चाहते है, तो वह तत्काल एसडीएम कार्यालय से ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवाते हैं।

सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि अगर ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट ही नहीं बनेगा तो कोई कैसे प्रमाणित करेगा कि वह गरीब हैं, उसकी वार्षिक आय क्या है। गरीबी को प्रमाणित करने का एकमात्र तरीका एसडीएम कार्यालय से बना आय प्रमाण पत्र यानि ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट है। अब अगर कोई व्यक्ति बीमार है, तो बिना सर्टिफिकेट के उसका ईडब्ल्यूएस बेड पर दाखिला कैसे होगा। जिन बच्चों के ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत एडमिशन होने हैं, उनके लिए भी मुश्किलें खड़ी होंगी। कई बार लोग ईडल्ब्यूएस सर्टिफिकेट के आवेदन कर देते हैं, लेकिन मिला नहीं होता है। कई बार लोग बता देते हैं कि वह ईडब्ल्यूएस हैं, लेकिन सर्टिफिकेट नहीं लिए होते हैं। कई लोग सोचते हैं कि जब एडमिशन कराने जाएंगे तब ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवा लेंगे। हजारों बच्चों का दाखिला ईडब्ल्यूएस कोटे में होना था, भाजपा सरकार ने उनकी पूरी जिंदगी खराब कर दी। जिन लोगों की नौकरियां ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के आधार पर लगनी थीं, अब वो भी नहीं बनवा पाएंगे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार में इस तरह से फैसले नहीं लिए जाते हैं। अगर सरकार को ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया में कोई ऐतराज है तो उसे ठीक करके सर्टिफिकेट बना सकती है। लेकिन सरकार ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया कैसे बंद कर सकती हैं? यह तो कोई सोच भी नहीं सकता कि सरकार इस तरह के निर्णय ले सकती है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी मिनट्स में कहा गया है कि ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनाने में कुछ खामियां पाई गई हैं। इसलिए आगे से सभी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनाने बंद किए जा रहे हैं। इसमें लिखा है कि सरकार अब तक जारी किए गए ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट्स की जांच करेगी, क्योंकि आशंका है कि बड़ी संख्या में अयोग्य लोगों को ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। जब तक सरकार का दूसरा फैसला नहीं आ जाता है, तब तक राजस्व विभाग द्वारा कोई नया ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएंगे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर ईडब्ल्यूएस इसर्टिफिकेट गलत जारी हुए, तो यह एसडीएम ने किया। एसडीएम को उपराज्यपाल (एलजी) नियुक्त करते हैं। एलजी खुद एसडीएम की लिस्ट अपनी मर्जी से बनाते हैं। एलजी ने ऐसे लोगों को एसडीएम और डीएम क्यों नियुक्त किया? अगर गलत सर्टिफिकेट बने हैं, तो एलजी ने कितने एसडीएम, एडीएम या डीएम पर कार्रवाई की गई? क्या किसी को बर्खास्त किया गया? क्या किसी को निलंबित किया? जिन्होंने गलती की है, एलजी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन जो गरीब लोग ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवाने आएंगे, उन्हें सजा दे रहे हैं। गलती एलजी के अफसर कर रहे हैं और सजा गरीब आदमी को दे रहे हैं। यह सरकार पूरी तरह गरीब विरोधी सरकार है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार का यह फैसला प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है। जब ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट ही नहीं बनेगा, तो गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त सीट नहीं ले पाएंगे। प्राइवेट अस्पतालों को भी फायदा होगा, क्योंकि ईडब्ल्यूएस बेड पर कोई गरीब मुफ्त इलाज नहीं करा पाएगा। यह खुलेआम प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों को लाभ पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया

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